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Vidyalaya Ki Safalta Ke Sutra
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Written byAjay Kumar Pandit - Book TitleVidyalaya Ki Safalta Ke Sutra
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Author: Ajay Kumar Pandit
ISBN: 978-81-977045-3-6
Publisher: Authors Tree Publishing
Pages: 176
Language: Hindi
Price: Rs. 399/- Rs. 299/- Only
Shipping: Extra
Format: Paperback
Category: Education / School System / Teacher Development
Delivery Time: 6 to 9 working days
About the Book
यह पुस्तक शिक्षा प्रणाली की वास्तविकता को उजागर करने वाली एक सशक्त और विचारोत्तेजक रचना है।
लेखक ने अपने 25 वर्षों के अनुभव के आधार पर सरकारी और निजी विद्यालयों की चुनौतियों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।
यह पुस्तक बताती है कि कैसे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाकर विद्यालयों को आदर्श बनाया जा सकता है।
इसमें शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए मार्गदर्शन और जागरूकता का संदेश दिया गया है।
लेखक का उद्देश्य केवल समस्याएँ बताना नहीं, बल्कि समाधान की दिशा में सोच विकसित करना है।
यह पुस्तक हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो शिक्षा प्रणाली में बदलाव और सुधार चाहता है।
एक प्रेरणादायक प्रयास जो शिक्षा जगत में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा दिखाता है।
About the Author
Ajay Kumar Pandit
विद्यालय की सफलता के सूत्र नामक पुस्तक के लेखक श्री अजय कुमार पंडित है वह विज्ञान विषय से स्नातक और शिक्षा विषय से स्नातकोत्तर हैं। वे बिहार राज्य के पूर्णियां जिले के निवासी हैं। उनके माता-पिता कम पढ़े-लिखे हैं। गांव और गरीबी से उनका करीब का रिश्ता है।
वे विगत 25 वर्षों से शिक्षा क्षेत्र में शिक्षण कार्य करते आ रहे हैं। वे समाज के गरीब और होनहार बच्चे को शिक्षा के लिए अतिरिक्त समय देते हैं। उनके द्वारा पढ़ाए गए सैकड़ों बच्चे आज सरकारी नौकरी में अपनी सेवा दे रहे हैं। असहाय बुजुर्गों और विधवाओं के प्रति उनके मन में श्रद्धा और दया का भाव रहता है। इसलिए इन लोगों के बीच वे समय-समय पर अन्नदान और वस्त्रदान करते रहते हैं।
वे 'स्ट्रैंथेनिंग द रूट ऑफ़ इंडिया' मिशन पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि राष्ट्र एक फलदाई वृक्ष के समान है, जिसकी जड़ बच्चे हैं। देश की दिशा और दशा बदलने वाले महापुरुष इस वृक्ष के फल के समान होते हैं। यदि जड़ मजबूत न हो तो वृक्ष में अच्छे फल नहीं उग सकते। इसीलिए वे राष्ट्र की जड़ यानि बच्चों को शिक्षा देकर मजबूत करना चाहते हैं।

