Books of Suryakant Gautam
मैं, सूर्यकांत गौतम, हाइड्रोजन और कार्बन का एक साधारण-सा संयोजन, प्रजाति: होमो सेपियन्स।
मानव सभ्यता द्वारा निर्मित शिक्षा के पथ पर चलते हुए, मुझे इतिहास की धरोहरों को संजोने का सौभाग्य मिला (A Conservation Architect)। एक कवि के रूप में मैंने स्वयं को खोजा, सुरों की हल्की-सी छाया में मन को बहलाया, और कला के छोटे-छोटे रंगों में अपने अस्तित्व को उकेरता रहा।
निम्न वर्ग में जन्म लेने के कारण, आरक्षण की पहचान से जुड़े एक विद्यार्थी के रूप में, अपनी प्रतिभाओं को समाज के सामने सिद्ध करने की हर दिन एक कोशिश करता रहा हूँ।
उस मानव सभ्यता के मन की लालच और सामाजिक बुराइयों को समझते हुए, मैंने अपने मन को कई बार दुखी और विचलित पाया। अपनी आँखों के आँसुओं को जेब में समेटकर, और मन की चीखों को शब्दों में व्यक्त कर, मैं उन्हें इन पन्नों में दफनाने आया हूँ।
थोड़ा सा पागल... पर आज़ाद,
और फिलहाल, खुश हूँ।
मगर एक बदलाव की उम्मीद में हूँ...
इन्हीं पन्नों पर, अपने अस्तित्व के बिखरे हुए टुकड़ों को समेटते हुए, मैं कुछ पंक्तियाँ सुनाने आया हूँ।
यह किताब मेरी नहीं बल्कि मेरे कुछ गमों के नाम, मेरे कई आँसुओं के नाम... एक अलग सोच के नाम... एक सादगी की उम्मीद के नाम है...।


