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Baarish
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Written byGagan Nayak - Book TitleBaarish
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ISBN: 978-93-47208-8XX-X
Publisher: Authors Tree Publishing
Pages: 128
Language: Hindi
MRP: Rs. 249/- SAVE Rs.24
Offer Price: Rs. 225/-
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Category: Novel / Fiction
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About the Book
यह कहानी एक ऐसे इंसान की है, जो जिंदगी की भागदौड़ में अपने सपनों और अपनी खुशियों को कहीं पीछे छोड़ चुका है।
लेकिन एक दिन उसकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से होती है, जो उसकी पूरी दुनिया को एक अलग नजरिए से देखने पर मजबूर कर देता है। दो अनजान लोग, एक अनोखी मुलाकात और फिर शुरू होता है एक ऐसा सफर, जिसमें उन्हें प्यार के साथ-साथ जिंदगी की सच्चाई, अधूरे सपनों और रिश्तों की गहराई का एहसास होता है।
समय के साथ यह मुलाकात एक ऐसे रिश्ते में बदलने लगती है, जहाँ भावनाएँ शब्दों से अधिक मायने रखती हैं। साथ बिताए गए छोटे-छोटे पल उनकी जिंदगी को नया अर्थ देते हैं और उन्हें यह समझने में मदद करते हैं कि प्यार केवल किसी को पाने का नाम नहीं, बल्कि किसी की मौजूदगी को महसूस करने और उसे समझने का नाम भी है।
लेकिन हर खूबसूरत सफर अपनी मंजिल तक पहुँचे, यह जरूरी नहीं। कुछ सफर ऐसे होते हैं जो हमें मंजिल से ज्यादा जिंदगी का मतलब समझा जाते हैं। कुछ रिश्ते भले ही अधूरे रह जाएँ, लेकिन उनकी यादें जीवनभर हमारे साथ चलती रहती हैं।
यह कहानी प्यार, सपनों, जुदाई और उन खूबसूरत पलों की है, जिन्हें इंसान पूरी जिंदगी अपने दिल में संजोकर रखता है। यह उन भावनाओं की कहानी है जो समय बीत जाने के बाद भी दिल में कहीं जीवित रहती हैं।
एक भावनात्मक सफर, जो आपको प्रेम की खूबसूरती, रिश्तों की गहराई और जिंदगी के उन अनमोल पलों से रूबरू कराएगा जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।
"हर मुलाकात मंजिल नहीं देती...
कुछ मुलाकातें पूरी जिंदगी का मतलब बदल देती हैं।"
About the Author
Gagan Nayak
गगन नायक छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन उनका जन्म, शिक्षा और बचपन जम्मू में बीता। बचपन से ही उनके भीतर एक अलग दुनिया बसती रही—एक ऐसी दुनिया, जिसे वे अपनी कल्पनाओं में देखते थे और फिर अपनी स्कूल की नोटबुक के आखिरी पन्नों पर शब्दों के रूप में उतारने की कोशिश करते थे।
उन्हें बचपन से ही कहानियों और फिल्मों से गहरा लगाव रहा। उनके लिए फिल्में सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं थीं, बल्कि अपनी बात कहने का एक जरिया थीं। उनके मन में हमेशा एक सपना था कि वे अपनी कहानी को पर्दे पर उतारें, अपनी सोच और अपने विचारों को दुनिया के सामने रखें और लोगों को अपनी बनाई हुई उस दुनिया का हिस्सा बनाएं, जिसे वे वर्षों से अपनी कल्पनाओं में जीते आए थे।
इसी सपने को अपने साथ लेकर 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद गगन मुंबई चले गए। उन्होंने वहाँ फिल्म मेकिंग की पढ़ाई की और फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव हासिल किया। अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर उन्होंने एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। उनके निर्देशन को सराहा गया और उन्हें Best Director Debut का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
समय के साथ उन्होंने अपनी कल्पनाओं और अपने भीतर छिपी कहानियों को किताबों का रूप देना शुरू किया, ताकि वे उन लोगों तक पहुँच सकें, जिनसे शायद वे कभी आमने-सामने न मिल पाएँ।
“गगन का मानना है कि कहानियाँ सिर्फ पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं।”
वह इसी तरह अपनी कहानियों को शब्दों में ढालते हुए आगे भी लिखते रहना चाहते हैं और अपनी कल्पनाओं को दुनिया के साथ साझा करते रहना चाहते हैं।

