₹ 180
- Delivery Only India
- Status: In Stock
Deewaron Ke Paar
-
Written byS.K. Mandey - Book TitleDeewaron Ke Paar
ORDER NOW
Get your copy today with fast delivery
Publisher: Authors Tree Publishing
Pages: 142
Language: Hindi
Price: Rs.299/- Rs.180/- only
Shipping: EXTRA
Category: Fiction/Story/Love
Delivery Time: 6 to 9 working days
About the Book
कुछ कहानियाँ लिखी नहीं जातीं — वे खुद-ब-खुद जी उठती हैं, ख़ामोशियों में उतरती हैं और दिल के किसी कोने में बस जाती हैं।
“दीवारों के पार” (कमरा नंबर – ख़्वाब) भी ऐसी ही एक कहानी है, जहाँ एक लड़की की दुनिया उसके ख़्वाबों की नरम चादर में लिपटी हुई है।
उसकी हर ख़ुशी, हर दर्द और हर ख़ामोशी सीधे पाठक के दिल से संवाद करती है — बिना शोर के, लेकिन गहराई से।
यह कहानी दोस्ती की भी है और प्यार की भी — उस दोस्ती की, जो शब्दों से परे है, जो आँखों की मुस्कान में झलकती है, और जो मौन में भी अपने होने का एहसास दिलाती है।
और यह कहानी प्यार की भी है — उस सच्चे प्यार की, जो बाँधता नहीं, बल्कि आज़ादी देता है। खुद को पहचानने की, दूसरे को समझने की और बिना किसी बंधन के जीने की।
यह किताब उन लम्हों को समेटती है जो शायद आपने भी महसूस किए हों — वो अधूरी बातें, वो अनकही मुलाक़ातें, और वो ख़्वाब जो अब भी दीवारों के पार आपका इंतज़ार कर रहे हैं।
हर पन्ना, हर शब्द, और हर एहसास आपको धीरे-धीरे उसकी दुनिया के और करीब ले जाएगा — जैसे कोई हल्की सी हवा आपके भीतर उतर रही हो।
- रोशनी कलमोदिया
About the Author
S.K. Mandey
सौरभ कुमार मान्डे, साहित्यिक नाम "एस. के. मान्डे" (S.K. Mandey), मध्य प्रदेश के अशोकनगर ज़िले के एक छोटे से गाँव नगऊखेड़ी के निवासी हैं। बचपन से ही उन्हें शायरी और कहानियों का गहरा शौक रहा है। स्कूल के दिनों से ही वे डायरी और लघुकथाओं के माध्यम से अपने विचारों और भावनाओं को काग़ज़ पर उकेरते आए हैं।
उनके लिए लेखन केवल शौक नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है, एक ऐसा माध्यम, जिसमें वे अपने अनुभव, सपने और अनकहे एहसास संजोते हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम की नमी, तन्हाई की ख़ामोशी और जीवन की सच्चाई का उजाला साथ-साथ झलकता है।
"दीवारों के पार" (कमरा नंबर: ख़्वाब) उनका पहला प्रकाशित लघु उपन्यास है। यह कहानी एक ऐसी यात्रा है, जिसमें सपनों को केवल देखा नहीं, बल्कि जिया जाता है।
"शब्द वही जीवित रहते हैं, जिन्हें हम सिर्फ़ बोलते नहीं, बल्कि 'जीकर' महसूस करते हैं।" - S.K. Mandey

